मध्य प्रदेश की शुगर मिल की जानकारी और सबसे ज़्यादा उत्पादन वाली मिल

मध्य प्रदेश में कितनी शुगर मिलें हैं

मध्य प्रदेश में कितनी शुगर मिलें हैं?

मध्य प्रदेश में लगभग 27 से 30 शुगर मिलें सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
ये मिलें मुख्य रूप से नरसिंहपुर, होशंगाबाद, खरगोन, बुरहानपुर, गाडरवारा , बड़वानी और जबलपुर जैसे जिलों में स्थित हैं।

प्रमुख शुगर मिलों की सूची (चयनित)

  • करेली शुगर मिल प्रा. लि. – करेली (नरसिंहपुर)

  • महाकौशल शुगर एंड पावर इंडस्ट्री – गदरवारा

  • नर्मदा शुगर मिल – गदरवारा (नरसिंहपुर)

  • रामदेव शुगर प्रा. लि. – होशंगाबाद

  • नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना – बुरहानपुर

  • मां रेवा शुगर प्रा. लि. – कुक्षी (धार)

  • ओलम एक्सपोर्ट्स (इंडिया) लि. – बड़वानी

सबसे ज़्यादा उत्पादन करने वाली मिल

https://www.statista.com/statistics/887349/india-sugar-consumption-volume/

उपलब्ध रिपोर्ट्स और उद्योग स्रोतों के अनुसार –
नरसिंहपुर जिले की शुगर मिलें (खासतौर पर करेली और गदरवारा की मिलें)

मध्य प्रदेश में सबसे ज़्यादा गन्ना क्रशिंग और चीनी उत्पादन के लिए जानी जाती हैं।

  • यहाँ गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है।

  • आधुनिक मशीनरी और क्षमता की वजह से इनका उत्पादन अन्य जिलों की तुलना में अधिक है।

 

शुगर मिल का नामजिला/स्थानप्रकारउत्पादन क्षमता/स्थिति (अनुमानित)
करेली शुगर मिल प्रा. लि.करेली (नरसिंहपुर)प्राइवेटसबसे अधिक उत्पादन, आधुनिक तकनीक
महाकौशल शुगर एंड पावर इंडस्ट्रीगाडरवारा (नरसिंहपुर)प्राइवेटउच्च उत्पादन, बिजली उत्पादन में भी सक्रिय
नर्मदा शुगर मिलगाडरवारा (नरसिंहपुर)प्राइवेटगन्ना क्रशिंग क्षमता अधिक, बड़े पैमाने पर
रामदेव शुगर प्रा. लि.होशंगाबादप्राइवेटमध्यम उत्पादन, क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय
नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखानाबुरहानपुरसहकारीकिसानों से जुड़ी सहकारी मिल, उत्पादन स्थिर
मां रेवा शुगर प्रा. लि.कुक्षी (धार)प्राइवेटउत्पादन अच्छा, पर क्षमता नरसिंहपुर से कम
ओलम एक्सपोर्ट्स (इंडिया) लि.बड़वानीप्राइवेट/कॉर्पोरेटआधुनिक मशीनरी, इथेनॉल प्रोजेक्ट में भी सक्रिय

शुगर इंडस्ट्री का महत्व

https://fcivlts.in/

  • किसानों की आय का बड़ा स्रोत: गन्ना किसानों के लिए शुगर मिलें स्थिर मार्केट देती हैं।

  • रोज़गार के अवसर: हज़ारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है।

  • राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान: शुगर मिलों से न सिर्फ चीनी बल्कि इथेनॉल और बिजली उत्पादन भी होता है।

मुख्य निष्कर्ष

  • नरसिंहपुर (करेली और गदरवारा क्षेत्र) की मिलें सबसे ज़्यादा उत्पादन करने वाली हैं।

  • सहकारी मिलें (जैसे नवलसिंह, बुरहानपुर) किसानों को सीधे लाभ पहुँचाती हैं, लेकिन उत्पादन क्षमता प्राइवेट मिलों से कम है।

  • कॉर्पोरेट संचालित मिलें (जैसे ओलम एक्सपोर्ट्स, बड़वानी) आधुनिक तकनीक और नए प्रोजेक्ट्स (जैसे इथेनॉल) में आगे हैं।

 

मध्य प्रदेश की प्रमुख शुगर मिलों की तुलना (वार्षिक उत्पादन सहित)

शुगर मिल का नामजिला/स्थानप्रकारअनुमानित वार्षिक उत्पादन (टन)विशेषता / स्थिति
करेली शुगर मिल प्रा. लि.करेली (नरसिंहपुर)प्राइवेट1.8 – 2.0 लाख टनसबसे अधिक उत्पादन, आधुनिक तकनीक
महाकौशल शुगर एंड पावर इंडस्ट्रीगाडरवारा  (नरसिंहपुर)प्राइवेट1.5 – 1.7 लाख टनउच्च उत्पादन + बिजली उत्पादन
नर्मदा शुगर मिलगाडरवारा  (नरसिंहपुर)प्राइवेट1.4 – 1.6 लाख टनगन्ना क्रशिंग क्षमता अधिक
रामदेव शुगर प्रा. लि.होशंगाबादप्राइवेट90,000 – 1.1 लाख टनमध्यम उत्पादन, क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय
नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखानाबुरहानपुरसहकारी70,000 – 85,000 टनकिसानों से जुड़ी सहकारी मिल, उत्पादन स्थिर
मां रेवा शुगर प्रा. लि.कुक्षी (धार)प्राइवेट80,000 – 1.0 लाख टनउत्पादन अच्छा, पर क्षमता नरसिंहपुर से कम
ओलम एक्सपोर्ट्स (इंडिया) लि.बड़वानीकॉर्पोरेट/प्राइवेट1.2 – 1.4 लाख टनआधुनिक मशीनरी, इथेनॉल प्रोजेक्ट में भी सक्रिय

 

मध्य प्रदेश में लगभग 27–30 शुगर मिलें हैं और इनमें से नरसिंहपुर की शुगर मिलें सबसे ज़्यादा उत्पादन करने के लिए जानी जाती हैं।

आने वाले समय में यदि आधुनिक तकनीक और सरकारी समर्थन मिलता रहा तो

यह राज्य चीनी उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों की सूची में और ऊपर जा सकता है।

https://erc.mp.gov.in/Home/Sugar

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