GST रिफॉर्म 2025: सरकार को ₹40,000 Cr का घाट, आम जनता को राहत

GST रिफॉर्म से सरकार को ₹40,000 Cr का घाट, जनता का फायदा

GST रिफॉर्म 2025 से आम जनता को राहत और सरकार को घाटा

 

नया GST ढांचा: आम आदमी के लिए बड़ी राहत

भारत सरकार ने हाल ही में GST (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) दरों में बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है।

मौजूदा चार स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को सरल बनाकर दो स्लैब (5% और 18%) में समेटने की योजना है।

इसके अलावा लक्ज़री और ‘सिन’ उत्पादों पर 40% टैक्स स्लैब लागू करने का सुझाव दिया गया है।

हालांकि इस सुधार से सरकार को अनुमानित ₹40,000 करोड़ का राजस्व घाटा हो सकता है,

लेकिन इससे आम जनता को सीधा फायदा मिलेगा

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उपभोक्ताओं के लिए फायदे

  • कीमतों में गिरावट: ज़रूरी और घरेलू सामान पहले से सस्ते मिलेंगे।

  • बचत और खपत में बढ़ोतरी: परिवारों के पास अतिरिक्त पैसा बचेगा, जिससे खपत और अर्थव्यवस्था दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

  • मुद्रास्फीति पर नियंत्रण: कम टैक्स दरें महंगाई को काबू में रखने में मदद करेंगी।

 

GST रिफॉर्म 2025: सवाल और जवाब

प्रश्नजवाब
Q2. किन वस्तुओं पर GST दरें कम होंगी?खाद्य पदार्थ, कपड़े, घरेलू उपकरण, टीवी, फ्रिज, एसी और मिड-रेंज कारों पर GST दरें कम होने की संभावना है।
Q3. किन वस्तुओं पर टैक्स बढ़ेगा?लक्ज़री कारें, 350cc से ऊपर की मोटरसाइकिलें, तंबाकू और शराब जैसी वस्तुओं पर 40% स्लैब लागू होगा।
Q4. क्या राज्यों को नुकसान होगा?हां, कई राज्यों ने अनुमान लगाया है कि उन्हें सालाना हजारों करोड़ का राजस्व नुकसान हो सकता है। इसलिए केंद्र से मुआवज़े की मांग की जा रही है।
Q5. आम जनता को कब से फायदा मिलेगा?GST काउंसिल की अगली बैठक में फैसला होने के बाद यह सुधार लागू होगा। लागू होने के तुरंत बाद रोज़मर्रा की वस्तुएं सस्ती दिख सकती हैं।

राज्यों की चिंता

जहां उपभोक्ता इस सुधार से खुश हैं, वहीं कई राज्य सरकारें राजस्व में कमी को लेकर चिंतित हैं।

आठ से अधिक राज्यों ने केंद्र से मुआवज़े और राजस्व सुरक्षा की मांग की है।

https://www.ndtv.com/india-news/nirmala-sitharaman-likely-to-place-gst-rate-overhaul-proposal-tomorrow-9117737

GST रिफॉर्म से सरकार को ₹40,000 Cr का घाट जनता का फायदा—

यह साफ है कि आने वाले दिनों में रोज़मर्रा की वस्तुएं और घरेलू सामान सस्ते होंगे।

इससे आम जनता की जेब पर बोझ कम होगा और अर्थव्यवस्था में खपत का नया दौर शुरू हो सकता है।

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