नेपाल अशांति: आंध्र सरकार ने काठमांडू में फंसे तेलुगु परिवारों की सुरक्षित वापसी शुरू की
नेपाल इन दिनों गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है।
राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं।
इसका सीधा असर वहाँ रह रहे विदेशी नागरिकों और पर्यटकों पर भी पड़ा है।
खासतौर पर आंध्र प्रदेश के कई तेलुगु परिवार इस अशांति के बीच काठमांडू में फँस गए,
जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने इमरजेंसी रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है।
नेपाल में विरोध क्यों हुआ?
नेपाल में चल रहे विरोध की बड़ी वजह राजनीतिक अस्थिरता, बेरोजगारी और आर्थिक संकट है।
जनता सरकार से बेहतर प्रशासन और रोज़गार के अवसर की मांग कर रही है।
वहीं, युवाओं में बढ़ती नाराज़गी ने आंदोलन को और तेज़ कर दिया है।
नेपाल की जेन-ज़ी पीढ़ी (Gen Z) इस आंदोलन में बड़ी भूमिका निभा रही है। वे चाहते हैं:
बेहतर शिक्षा और ग्लोबल स्तर पर मान्यता प्राप्त अवसर।
रोज़गार की गारंटी और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन।
भ्रष्टाचार पर सख़्त कार्रवाई और पारदर्शी शासन।
डिजिटल इंडिया जैसी तकनीकी और आधुनिक विकास योजनाएँ नेपाल में भी लागू हों।
युवा पीढ़ी साफ़ कह रही है कि सिर्फ़ परंपरागत राजनीति नहीं, बल्कि नए विचार और प्रगतिशील नीतियाँ ही देश को आगे ले जा सकती हैं।
जेन-ज़ी पीढ़ी की मुख्य माँगों
आंध्र प्रदेश सरकार क्या कर रही है?
नेपाल में बढ़ती अशांति के बीच आंध्र प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई की है।
नई दिल्ली में विशेष इमरजेंसी सेल स्थापित किया गया है।
काठमांडू में फँसे तेलुगु परिवारों से सीधे संपर्क किया जा रहा है।
सुरक्षित वापसी के लिए फ्लाइट और अन्य परिवहन साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
भोजन, आश्रय और चिकित्सा की तत्काल व्यवस्था की गई है।
सरकार ने हेल्पलाइन भी सक्रिय की है, ताकि कोई भी नागरिक बिना सहायता के न रहे।
नेपाल में जारी यह विरोध केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं की नई सोच और भविष्य की अपेक्षाओं को दर्शाता है।
वहीं, आंध्र प्रदेश सरकार की तत्परता यह साबित करती है
कि संकट के समय राज्य अपने नागरिकों को सुरक्षित घर पहुँचाने के लिए हरसंभव कदम उठाने को तैयार है।


