पंजाब में दशकों की सबसे बड़ी बाढ़, 1.75 लाख एकड़ खेत डूबे

दशकों की सबसे भीषण बाढ़ ने पंजाब को तबाह किया; 1.75 लाख एकड़ कृषि भूमि जलमग्न

पंजाब फसल नुकसान

 

 

पंजाब इस समय दशकों की सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहा है।

लगातार हो रही भारी बारिश ने नदियों और नालों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुँचा दिया है।

हालात इतने गंभीर हैं कि करीब 1.75 लाख एकड़ कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है।

खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर गहरा संकट छा गया है।

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बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके

जिलास्थिति / प्रभावप्रमुख फसल नुकसानराहत कार्य की स्थिति
तरनतारनसैकड़ों गाँव जलमग्नधान, मक्काएनडीआरएफ की टीम तैनात
फिरोजपुरखेत और सड़कें डूबींसब्जियाँ, गन्नाअस्थायी शिविर बने
कपूरथलानिचले इलाके प्रभावितधान, मक्काभोजन व दवा वितरण
जालंधरगाँवों में पानी भरासब्जियाँ, मक्कानावों से बचाव कार्य
होशियारपुरभारी बारिश से तबाहीधान, गन्नासेना की मदद ली गई

गाँवों के गाँव पानी में घिर गए हैं। ग्रामीणों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है।

किसानों की हालत बद से बदतर

बाढ़ ने पंजाब के किसानों पर दोहरी मार डाली है। एक तरफ धान, मक्का और सब्जियों जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं,

वहीं दूसरी ओर अगले सीजन की बुवाई पर भी खतरा मंडरा रहा है। खेती पर निर्भर लाखों परिवारों की आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है।

सरकार और प्रशासन की कोशिशें

राज्य सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ और सेना की मदद ली है।

प्रभावित इलाकों में भोजन, दवा और अस्थायी शिविरों की व्यवस्था की जा रही है।

साथ ही, किसानों को फसल मुआवजा देने का भी आश्वासन दिया गया है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि अव्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम और जल प्रबंधन की कमी का नतीजा भी है।

अगर समय रहते नदियों और नालों की सफाई की जाती तो नुकसान कुछ कम हो सकता था।

https://www.aajtak.in/india/punjab/story/punjab-floods-worst-since-1988-people-affected-cm-mann-relief-appeal-ntc-dskc-2324976-2025-09-03

पंजाब की यह बाढ़ सिर्फ कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन के लिए भी बड़ा संकट है।

अब जरूरत है कि सरकार राहत पैकेज के साथ-साथ लंबे समय के लिए जल प्रबंधन की ठोस रणनीति बनाए,

ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी को रोका जा सके।

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