Sonam Wangchuk ने Leh Protest2025

उन्होंने इस घटना की न्यायिक जांच (Judicial Probe) की मांग करते हुए केंद्र और राज्य प्रशासन से पारदर्शिता बरतने की अपील की है।
लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक नेता सोनम वांगचुक ने हाल ही में लेह में हुए
प्रदर्शनों के दौरान चार नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता जताई है।
यह घटना तब हुई जब लेह में स्थानीय लोगों ने राज्य का दर्जा (Statehood) और सिक्स्थ शेड्यूल के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें चार लोगों की जान चली गई।
वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोगों की आवाज़ लंबे समय से अनसुनी की जा रही है।
उन्होंने Apex Body of Leh और Kargil Democratic Alliance (KDA) के प्रयासों का समर्थन करते हुए कहा
कि लद्दाख को सिक्स्थ शेड्यूल का दर्जा मिलना चाहिए,
ताकि यहाँ के पर्यावरण, भूमि और संस्कृति की रक्षा की जा सके।
लद्दाख की स्थिति और सिक्स्थ शेड्यूल की अहमियत
सिक्स्थ शेड्यूल के तहत आने वाले क्षेत्रों को विशेष प्रशासनिक अधिकार और सांस्कृतिक संरक्षण मिलता है।
इस व्यवस्था के तहत स्थानीय परिषदों को भूमि, वन, और संसाधनों पर निर्णय लेने का अधिकार होता है।
लद्दाख जैसे संवेदनशील और पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्र में यह व्यवस्था वहां के लोगों के हितों की रक्षा कर सकती है।
वांगचुक और स्थानीय संगठनों का मानना है कि अगर सिक्स्थ शेड्यूल लागू किया गया,
तो यह क्षेत्रीय असमानता को दूर करने में मदद करेगा और लोगों को आत्मनिर्भर बनाएगा।

सरकार से उम्मीदें और आगे की राह
वांगचुक ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह लेह हिंसा की न्यायिक जांच जल्द से जल्द शुरू करे
ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ चार लोगों की मौत का मामला नहीं है,
बल्कि यह पूरे लद्दाख की आवाज़ है जो न्याय और पहचान की मांग कर रही है।
स्थानीय संगठनों का कहना है कि अगर सरकार ने अब भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा।
लद्दाख की यह घटना सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक सामाजिक और राजनीतिक चेतावनी है
कि पहाड़ी इलाकों के लोगों को अब संवैधानिक अधिकार और पर्यावरणीय सुरक्षा दोनों की जरूरत है।
