अफग़ानिस्तान में भूकंप भयावह आपदा
अफग़ानिस्तान में 6.0 तीव्रता का भूकंप 31 अगस्त 2025 की रात अफग़ानिस्तान के पूर्वी हिस्सों में आए 6.0 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई। सबसे अधिक प्रभावित कुनर और नंगरहार प्रांत रहे, जहाँ घर पूरी तरह ढह गए और सैकड़ों परिवार बेघर हो गए। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, अब तक 812 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,800 से ज़्यादा लोग घायल हैं।
भूकंप का केंद्र जुलेलाबाद क्षेत्र से थोड़ा दूर था और इसकी गहराई केवल 10 किलोमीटर मापी गई, जिसे ‘शैलो’ भूकंप माना जाता है। ऐसे भूकंपों में नुकसान सामान्य से कई गुना अधिक होता है, क्योंकि इसका असर सीधे ज़मीन की सतह पर पड़ता है।
अफग़ानिस्तान में 6.0 तीव्रता का भूकंप कुनर और नंगरहार में सबसे ज़्यादा तबाही
कुनर प्रांत में 610 से अधिक मौतें दर्ज की गईं जबकि नंगरहार में भी दर्जनों लोग मारे गए। कई गाँव पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि भूस्खलन और टूटी हुई सड़कें राहत कार्यों में बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
लोगों का कहना है कि कई परिवार अभी भी मलबे में दबे हो सकते हैं और वास्तविक मौत का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
राहत और बचाव अभियान
अफग़ानिस्तान में 6.0 तीव्रता का भूकंप तालिबान प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। 40 से अधिक हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं और मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों में भेजी गई हैं। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है।
हालांकि भारी बारिश और पहाड़ी रास्तों की वजह से राहतकर्मियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रभावित गाँवों तक पहुंचने के लिए हेलिकॉप्टर ही एकमात्र साधन हैं।
अंतर्राष्ट्रीय मदद की अपील
तालिबान सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से त्वरित मदद की गुहार लगाई है। संयुक्त राष्ट्र और अफग़ान रेड क्रेसेंट ने प्राथमिक सहायता भेजना शुरू कर दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है।
बीते कुछ सालों में अफ़ग़ानिस्तान को मिलने वाली अंतर्राष्ट्रीय सहायता में बड़ी कमी आई है। 2022 में जहाँ मदद $3.8 बिलियन थी, वहीं 2025 में यह घटकर केवल $767 मिलियन रह गई। यही वजह है कि मौजूदा आपदा से निपटना और भी मुश्किल हो गया है।
https://www.reuters.com/world/asia-pacific/earthquake-afghanistan-kills-800-injures-2800-2025-09-01/
पिछले भूकंपों की याद
अफ़ग़ानिस्तान का इतिहास बताता है कि यह इलाका हमेशा से भूकंप की चपेट में रहा है।
2022 में पक्तिका प्रांत में आए भूकंप में 1,000 से अधिक मौतें हुई थीं।
1998 में उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में आए भूकंप में 4,000 लोगों की जान गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान का हिमालयन फॉल्ट ज़ोन पर होना इसकी सबसे बड़ी वजह है।
निष्कर्ष
अफ़ग़ानिस्तान का यह हालिया भूकंप केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक मानवतावादी संकट है। कमजोर ढांचा, घटती अंतर्राष्ट्रीय मदद और कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ इस त्रासदी को और भी भयावह बना रही हैं। अब ज़रूरत है कि वैश्विक समुदाय तुरंत आगे आए और प्रभावित लोगों को राहत पहुँचाने में सहयोग करे।


